जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से आयोजित संबंधित पक्षों की 26वीं बैठक (कॉप-26) इस साल नवंबर में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाली है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया का रुख जलवायु वार्ता को सफल बनाने में जुटे अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यूरोपीय संसद के नीदरलैंड्स से निर्वाचित सदस्य बास एइकहाउट ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘सभी विकसित देशों के बीच सबसे कमजोर रुख ऑस्ट्रेलिया का ही है। यह साफ है कि ऑस्ट्रेलिया मूल रूप से जलवायु वार्ताओं से गैर-हाजिर रहेगा।’
द्विपक्षीय व्यापार से समझौते से जलवायु परिवर्तन संबंधी शर्त को हटा देने के लिए ब्रिटेन की भी कई हलकों से आलोचना हो रही है। इस बारे में सफाई देते हुए ब्रिटिश सरकार के एक अधिकारी कहा कि ब्रिटेन ऑस्ट्रेलियाई सरकार से ये कहना जारी रखे हुए है कि वह जलवायु संकट को गंभीरता से ले।
खबरों के मुताबिक ग्लासगो बैठक की तैयारियों से जुड़े अधिकारियों में इस बात को लेकर चिंता गहराती जा रही है कि ऑस्ट्रेलिया कॉप-26 के दौरान प्रमुख मुद्दों पर प्रगति की राह में बाधक बन सकता है। यूरोपीय संसद के जर्मनी से निर्वाचित सदस्य पीटर लीसे ने सीएनएन से कहा- ‘हमें ऑस्ट्रेलिया जैसे अपने सहयोगी देश पर दबाव बढ़ाना होगा। ऑस्ट्रेलिया में किसी महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य के प्रति को खुद वचनबद्ध करने को लेकर एक आम हिचक है। यह इस देश के लिए शर्मनाक है, क्योंकि खुद उसे भी जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं।’