चीन में वस्तुओं की मांग बढ़ने से कच्चे माल की कमी होने लगी है। इससे उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से उद्योग और कल कारखाने की महंगाई अब तक के ऊच्चतम स्तर पर है।स्टील, फर्नेस आयल, प्लास्टिक, इलेक्ट्रानिक्स व आटो पार्ट्स के कच्चे माल की भारी कमी हुई हैं।
कोरोना संकट के बाद चीन में वस्तुओं की मांग बढ़ने और अचानक से कोयले की कमी के कारण बिजली संकट उत्पन्न होने से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से उद्योग और कल कारखानों की महंगाई रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। स्टील, फर्नेस आयल, प्लास्टिक, इलेक्ट्रानिक्स व आटो पार्ट्स के कच्चे माल की भारी कमी हुई हैं। कच्चे माल की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की समस्या से जूझ रहे व्यवसायों पर दबाव बढ़ने से सितंबर में चीन की वार्षिक फैक्ट्री गेट की कीमतें उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
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राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के आंकड़ों के मुताबिक, उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) एक साल पहले की तुलना में 10.7 फीसदी बढ़ा है, अक्तूबर 1996 में प्राप्त आंकड़ों के बाद से इसमें अबतक की सबसे तेज गति देखी गई है। इसकी तुलना रॉयटर्स पोल में 10.5% पूर्वानुमान और अगस्त में 9.5% की वृद्धि के साथ की गई।
एनबीएस के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि चीन का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सितंबर में साल-दर-साल 0.7% बढ़ा, जबकि रॉयटर्स पोल में अपेक्षित 0.9% और अगस्त में 0.8% की बढ़ोतरी हुई।