चीन ने अब यह साफ कर दिया है कि म्यांमार में सैनिक शासन के खिलाफ किसी अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का वह खुला विरोध करेगा। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दक्षिण पूर्व एशिया के तमाम देशों का आह्वान किया है कि ‘विदेशी शक्तियों के म्यांमार में दखल को ले कर वे सतर्क रहें।’ वांग ने ये टिप्पणी सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस की अपनी हफ्ते भर की यात्रा की समाप्ति के मौके पर की। उन्होंने कहा- ‘हमें इसे लेकर सतर्क रहना चाहिए कि कुछ विदेशी ताकतें गलत मकसद से म्यांमार में घुसपैठ की कोशिश कर सकती हैं, जिससे वहां अशांति और विभाजन बढ़ेगा और हालात ज्यादा पेचीदा होंगे।’
गौरतलब है कि म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों पर बढ़ते जा रहे दमन के साथ पश्चिमी देशों ने वहां के सैनिक शासकों की आलोचना तेज कर दी है। विश्लेषकों ने कहा है कि चीन के ताजा बयान से म्यांमार के सैनिक शासकों का मनोबल बढ़ सकता है। गौरतलब है कि वांग ने म्यांमार के सैनिक शासकों पर पर प्रतिबंध लगाने और उन पर दबाव डालने की नीति का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ‘निष्पक्ष’ नजरिया अपनाना चाहिए और ऐसा अनुकूल बाहरी वातावरण तैयार करना चाहिए, जिससे म्यांमार में राजनीतिक मेल-मिलाप का रास्ता निकले।
हाल में संकेत मिले हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया में म्यांमार में जारी दमन को लेकर बेचैनी बढ़ी है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के मौजूदा प्रमुख ब्रुनेई ने सोमवार को म्यांमार के मुद्दे पर आसियान की बैठक बुलाने की अपील की। इंडोनेशिया पहले ही आसियान से अपील कर चुका है कि वह म्यांमार की समस्या का बातचीत से हल निकालने की कोशिशें तेज करे। मलेशिया भी इस मुद्दे पर आसियान की बैठक बुलाने का समर्थन कर रहा है। मलेशिया के प्रधानमंत्री मुहिद्दीन यासिन और ब्रुनेई के सुल्तान हसनाल बोलकियाह की आपसी मुलाकात के बाद जारी एक साझा बयान में आसियान के सचिवालय जकार्ता में म्यांमार के मुद्दे पर बैठक बुलाने की तैयारियां शुरू करने की अपील की गई।
जानकारों के मुताबिक आसियान में हो रही इन हलचलों से चीन चिंतित है। वह म्यांमार में किसी बाहरी दखल का विरोधी है। म्यांमार में हो रही घटनाओं को उसने पूरी तरह म्यांमार का अंदरूनी मामला कहा है। उसने म्यांमार के सभी पक्षों से बातचीत से संविधान और कानूनी ढांचे के भीतर यथासंभव राजनीतिक सहमति बनाने की अपील की है। वांग ने कहा कि म्यांमार के मामले में चीन आसियान के साथ मिला-जुला रुख तय करने को इच्छुक है। इसके लिए वह आसियान को सभी जरूरी मदद देने को तैयार है।
विश्लेषकों का कहना है कि वांग की ये टिप्पणी मानवाधिकारों के मुद्दे पर चीन की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच आई है। खास कर शिनजियांग प्रांत में उइगर अल्पसंख्यकों के कथित दमन को लेकर पश्चिमी देशों ने चीन पर दबाव बढ़ा रखा है। ऐसे में चीन की चिंता यह है कि अगर मानवाधिकार रक्षा के नाम पर म्यांमार में अंतररष्ट्रीय दखल दिया गया, तो उससे शिनजियांग में भी ऐसे हस्तक्षेप को तर्क मिलेगा। इसलिए वह अपनी मजबूरी में म्यांमार के सैनिक शासकों का भी समर्थन कर रहा है।
म्यांमार में सैनिक शासन विरोधी प्रदर्शनों पर सैनिक कार्रवाई में 500 से ज्यादा आंदोलनकारी मारे जा चुके हैं। लेकिन चीन ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। बल्कि उसने कहा है कि वह म्यांमार के सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। उसके इस रुख के कारण म्यांमार की जनता में चीन विरोधी भावनाएं तेज हुई हैं। जानकारों के मुताबिक लंबी अवधि में यह चीन के लिए घाटे का सौदा होगा। लेकिन अभी ऐसा लगता है कि चीन अपनी तात्कालिक हितों का ज्यादा ख्याल कर रहा है।