कोरोना वायरस वैक्सीन (सांकेतिक)
- फोटो : पिक्साबे
एस्ट्राजेनेका की ओर से बनाई गई कोरोना की वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोगों में गंभीर ब्लड क्लॉट की शिकायतें सामने आईं। हालांकि कनाडा के कुछ शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने इस गंभीर ब्लड क्लॉट के लिए एक असरदार इलाज खोज लिया है।
मैकमास्टर प्लेटलेट इम्यूनोलॉजी लैब के शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके लिए दो उपचार सामने आए हैं। पहला अंतरस्रावी इम्युनोग्लोबुलिन की उच्च खुराक के साथ एंटी-क्लॉटिंग दवाओं का एक संयोजन, जो प्रतिकूल दुष्प्रभाव का मुकालबला करेगा। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपे एक शोध में इसका दावा किया।
मैकमास्टर यूनिवर्सिटी ने इस उपचार को जीवनरक्षक इलाज बताया है। बता दें कि एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन लगने के बाद लोगों में एक गंभीर साइड इफेक्ट देखा गया है, जिसे टीका प्रेरित प्रतिरक्षा थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (वीआईटीटी) के नाम से जाना जाता है। एक शोधकर्ता ने जानकारी दी कि अगर मरीज को वीआईटीटी भी है, तो अब हमारे पास इसका इलाज है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि हमारे टेस्ट के जरिए हम इसे डायग्नोज कर सकते हैं, इलाज कर सकते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि इसका इलाज क्या है। बता दें कि कनाडा में इस तरह के 28 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से पांच लोगों की मौत हो गई। शोध में बताया गया कि तीन कनाडाई मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए, जिनमें ये गंभीर साइट इफेक्ट था।
इन तीनों मरीजों को इम्यूनोग्लोबुलिन की तेज खुराक दी गई, जिसके बाद देखा गया कि इन्यूनोग्लोबुलिन की खुराक ने प्लेटलेट एक्टिवेशन को बंद कर दिया और क्लॉट बनने से रोक दिया। शोधकर्ताओं ने बताया कि अब हम प्लेटलेट और क्लॉट के बनने के मैकेनिज्म को समझ चुके हैं।