लेकिन खबरों के मुताबिक इस घोषणा के पहले ही लगभग दस लाख लोगों को बूस्टर यानी वैक्सीन की तीसरी डोज लगाई जा चुकी है। इसको लेकर अब व्हाइट हाउस की कड़ी आलोचना हो रही है। इसके बावजूद कई अधिकारियों ने बाइडन प्रशासन के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि टीका लगवा चुके लोगों के कोविड-19 से फिर से संक्रमित होने की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए ये कदम उठाया गया था। एक अधिकारी ने कहा है- ‘इस्राइल, ब्रिटेन, जर्मनी आदि जैसे देशों में पहले ही बूस्टर डोज लगाई जा रही थी। उसे देखते हुए अगर हम कुछ नहीं करते, तो हमसे पूछा जाता कि बूस्टर डोज के बारे में आपकी योजना क्या है?’
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बूस्टर डोज पर तुरंत रोक लगाने की अपील की है। स्वास्थ्य क्षेत्र के कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी ऐसी ही मांग की है। इन संगठनों ने कहा है कि जब गरीब देशों में महज 20 फीसदी लोगों का टीकाकरण हुआ है, तब बाइडन ने अमेरिका में तीसरा डोज लगाने का फैसला कर लिया। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस अधनोम गेब्रेयेसस ने इसी महीने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था- ‘जब वैक्सीन की वैश्विक आपूर्ति को नियंत्रित करने वाली कंपनियां और देश यह सोचते हैं कि दुनिया के गरीब लोग वंचित रहने की अपनी स्थिति को स्वीकार कर लें, तब मैं चुप नहीं रह सकता।’