पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को लेकर वैज्ञानिकों ने कई तरह की अवधारणाएं दी है। अब भारतीय मूल के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी कार्बन, नाइट्रोजन और अन्य ऐसे तत्व ग्रहों के टकराने की उस घटना के बाद हुई, जिसके परिणामस्वरूप करीब 4.4 अरब वर्ष पहले चंद्रमा की उत्पत्ति हुई थी।
‘साइंस एडवांसेस’ जर्नल में प्रकाशित शोध अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। शोध के सह-लेखक और राइस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता राजदीप दासगुप्ता ने बताया, ‘प्राचीन काल में उल्कापिंडों के अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों को लंबे समय से यह पता था कि पृथ्वी और सौर मंडल की आंतरिक कक्षाओं में स्थित चट्टानों वाले अन्य ग्रहों में विघटन होकर तत्व निकलते रहते हैं, लेकिन इसके समय और प्रणाली पर बहस चलती रही।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी खोज पहली है, जो सभी भू-रासायनिक साक्ष्यों के अनुरूप समय की व्याख्या कर सकती है।’
यूनिवर्सिटी के स्नातक के छात्र दमनवीर ग्रेवाल ने प्रयोगों की कड़ी में लंबे समय से माने जा रहे इस सिद्धांत के परीक्षण के लिए साक्ष्य जुटाए कि पृथ्वी पर जीवन के लिए जिम्मेदार तत्व एक ग्रह के साथ टक्कर के बाद पैदा हुए थे। ग्रेवाल के अनुसार पृथ्वी पर कार्बन-नाइट्रोजन का अनुपात और कार्बन, नाइट्रोजन तथा सल्फर की पूरी मात्रा चंद्रमा की उत्पत्ति के संगत है।