अमेरिका ने लोकतंत्र पर वर्चुअल संवाद के लिए 110 देशों को आमंत्रित किया है। 9 और 10 दिसंबर को होने वाले इस सम्मेलन (समिट फॉर डेमोक्रेसी) के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारत और ताइवान समेत सभी सहयोगी देशों को निमंत्रण भेजा है लेकिन चीन, रूस और तुर्की को इससे बाहर रखा है। इस सूची से दक्षिण एशियाई देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका भी गायब हैं। सूत्रों के मुताबिक, वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं।
लोकतंत्र पर संवाद के लिए आयोजित इस सम्मेलन में आमंत्रण सूची चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ऑनलाइन शिखर सम्मेलन के बाद चीन को बाहर रखना बताता है कि अमेरिका शिनजियांग में उइगर, तिब्बत में वहां के नागरिकों से मानवाधिकार हनन और हांगकांग में सुधार कानून तथा ताइवान पर कब्जे की कोशिश को लेकर असंतुष्ट है। अमेरिका-चीन में दक्षिण सागर व हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी तनाव जारी हैं। जबकि उसने ताइवान को एक स्वतंत्र देश के बतौर आमंत्रित कर चीन से टकराव के संकेत दिए हैं।
उधर, रूस के यूक्रेन विवाद और बेलारूस में पोलैंड के खिलाफ सीमा विवाद पर नाराजी जताई है। तुर्की के नाटो का सदस्य देश होने के बावजूद उसे निमंत्रित नहीं किया गया, जिसका कारण रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीदी मानी जा रही है। जबकि भारत को उसने आमंत्रित किया है।
भारत के साथ पाक, इराक भी शामिल
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा लोकतंत्र पर संवाद के लिए जिन देशों को आमंत्रित किया गया है उनमें भारत, पाकिस्तान और इराक भी शामिल हैं। भारत के साथ रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदी को लेकर जारी विवाद के बावजूद उन्होंने भारत की ताकत को स्वीकारा है। जबकि पाकिस्तान और इराक के साथ अंतरराष्ट्रीय मतभेदों और वित्तीय मदद रोकने के बाद भी उन्हें इस वर्चुअल संवाद में बुलाया है।
अफगानिस्तान को भी अलग रखा
हाल ही में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य वापसी के बाद इस युद्धग्रस्त देश पर तालिबान के कब्जे को मान्यता नहीं देने वाले अमेरिका ने अपने संवाद कार्यक्रम से उसे भी बाहर ही रखा है। इससे पता चलता है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन को भी अमेरिका लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानता है। अफगानिस्तान में कई प्रयासों के बावजूद तालिबान को वैश्विक मान्यता दिलाने में अमेरिका ने बाधा खड़ी की है।
चीन के सैन्य ठिकाने पर निर्माण कार्य रोका गया
दूसरी ओर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस साल यूएई में एक गुप्त चीनी सैन्य ठिकाने पर निर्माण कार्य के सबूत मिले। इसे वाशिंगटन के दखल के बाद अब रोक दिया गया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल का हवाला देकर पॉलिसी रिसर्च समूह के स्ट्रैटेजिक इनसाइट ने बताया कि खलीफा बंदरगाह पर उपग्रह तस्वीरों की सहायता से चीनी शिपिंग कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित एक कंटेनर टर्मिनल में संदिग्ध निर्माण का खुलासा हुआ था।
चीन ने हिंद-प्रशांत पहल को स्वीकार किया
चीन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर हिंद-प्रशांत पहल को स्वीकार किया है। इसे वह अब तक नकारता रहा था। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, ‘चीन ने भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल पर गौर किया है।’ वे आसियान-चीन वार्ता संबंधों की 30वीं वर्षगांठ से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे।
रणनीतिक हिंद-प्रशांत पर उन्होंने कहा, चीन हमेशा क्षेत्रीय ढांचे में आसियान की भूमिका तथा क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़ी भूमिका निभाने में उसका समर्थन करता है। इससे पहले शी ने कहा था कि दक्षिण सागर में स्थिरता की रक्षा के लिए साझा कोशिशों की जरूरत है।