कलेक्टर मजारी ने कहा, 'मेरे जिले में कई थानों पर आतंकियों ने कब्जा जमा लिया था। वे स्थानीय लोगों पर दबाव बनाते थे कि वे लोग उन्हें टैक्स दें।' साथ ही वह सुरक्षाबलों से हथियार लूटकर भी ले जाते थे। उन्होंने कहा कि मैंने लोगों को आतंकियों से निपटने की ट्रेनिंग दिलवाई और उन्हें हथियार मुहैया करवाया। भ्रष्टाचार अधिक होने की वजह से पुलिस भी काम नहीं करती, इसलिए लोगों को खुद ही महफूज रहने के लिए तैयार किया गया।
तालिबानी आंतकियों को इस तरह समझाया
सलीमा मजारी ने कहा कि आप जिंदगीभर जंग नहीं लड़ सकते हैं। मैंने तालिबान को भी यही बात समझाई। एक महीने पहले तालिबान ने यहां के गांव पर हमला कर कब्जा कर लिया और लोगों से टैक्स देने को कहा। जब लोगों ने ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने महिलाओं और बच्चों की हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि मैंने गांव के कुछ बुजुर्गों के जरिए तालिबानी आतंकियों से संपर्क किया और उन्हें अमन के लिए मनाया। मैंने उन्हें कहा कि हम दोनों ही लोगों का इस्लाम एक ही है। मजारी ने बताया कि उन्होंने आतंकियों से कहा कि आप लोग महिलाओं को हिजाब पहनता हुआ देखना चाहते हैं, मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन इस्लाम हत्या करना नहीं सिखाता है। इसके परिणामस्वरूप 125 आतंकियों ने एक माह के भीतर ही हथियार डाल दिए।
युवाओं को भड़का रहा पाकिस्तान
मजारी ने कहा कि पाकिस्तान स्थानीय युवाओं को भड़काने का काम करता है। युवाओं को ट्रेनिंग देकर कट्टरपंथ के रास्ते पर चलाया जाता है। बाद में ये लोग अपने ही लोगों का खून बहाते हैं। भ्रष्टाचार से तो हम लोग साथ मिलकर ही लड़ सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही हजारों आतंकी हथियार छोड़ेंगे और देश की मुख्यधारा में शामिल होंगे।