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अफगानिस्तान: आईएस-के का गढ़ है नंगरहार प्रांत, रात में अपने ठिकाने से बाहर नहीं निकलते तालिबान के सुरक्षा बल

Sat, 20 Nov 2021 09:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, चपरहार

सार

अफगानिस्तान में कवरेज कर रहे आस्ट्रेलिया में जन्मे पत्रकार ओली मैके ने नंगरहार प्रांत में आईएस-के की मजबूती का जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया है। उन्होंने केन्यूज में लिखा कि अफगानिस्तान के पूर्वी नंगरहार प्रांत की लगभग 55 हजार की आबादी वाला चपरहार जिला लंबे समय से देश में बड़े आतंकी हमलों के लिए आतंकवादी संगठन (आईएस-के) का आधार रहा है। 
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तालिबान (फाइल) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भले ही अफगानिस्तान पर तालिबान काबिज हो, लेकिन देश के कई इलाकों में जाना उसके लिए खतरे से खाली नहीं है। ऐसा ही एक इलाका हैं नंगरहार, जो इस्लामिक स्टेट खोरासान (आईएस-के) का गढ़ है। यहां तालिबान के सुरक्षा बल रात में ठिकानों से बाहर तक नहीं निकलते। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से यहां आईएस-के की सक्रियता और बढ़ गई है।

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अफगानिस्तान में कवरेज कर रहे आस्ट्रेलिया में जन्मे पत्रकार ओली मैके ने नंगरहार प्रांत में आईएस-के की मजबूती का जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया है। उन्होंने केन्यूज में लिखा कि अफगानिस्तान के पूर्वी नंगरहार प्रांत की लगभग 55 हजार की आबादी वाला चपरहार जिला लंबे समय से देश में बड़े आतंकी हमलों के लिए आतंकवादी संगठन (आईएस-के) का आधार रहा है। 

15 अगस्त को अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से इस इलाके में आईएस-के और मजबूत हुआ है। यह इलाका आईएसआईएस के सहयोगी दाएश की गतिविधियों के संचालन का गढ़ है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान शासन के बाद से यहां अब तक 20 शव मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि दो दिन पहले एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हम नहीं जानते उसे किसने मारा।
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हर दिन किसी न किसी की हत्या
ओली मैके की रिपोर्ट के मुताबिक, चपरहार जिले के लोग बताते हैं कि यहां हर दिन किसी न किसी को घर से निकालकर गोली मार दी जाती है। 23 वर्षीय गार्ड समीउल्ला बताते हैं कि वर्ष 2015 की शुरुआत से दाएश यहां पर है। यहां उनका ही राज है। तालिबान हों या फिर पिछली सरकार के सैनिक रहे हों, वे यहां दिन में ही रहते हैं।

तालिबान ने भी माना इलाके में आईएस-के सक्रिय
चपरहार के तालिबान गर्वनर ऐनुद्दीन उर्फ बदरुद्दीन ने भी बेमन से माना कि इस इलाके में आईएस-के आतंकवादी सक्रिय हैं। आतंकी कहीं छिपे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि तालिबान यहां पूरी तरह काबिज है और इलाका हमारे नियंत्रण में है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार जब आप जलालाबाद शहर से दूर चपरहार की सड़क पर जितना आगे जाते हैं, यह इलाका उतना ही भयावह हो जाता है। कोई यातायात नहीं और तालिबान की चौकियां भी गायब हो जाती हैं। 

फिरौती मिलने के बावजूद अगवा प्रसिद्ध डॉक्टर की हत्या
एक अन्य घटना में उत्तरी अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत में मजार-ए-शरीफ शहर से दो महीने पहले अगवा प्रसिद्ध चिकित्सक मोहम्मद नादेर अलेमी की फिरौती मिलने के बावजूद अपहरणकर्ताओं ने हत्या कर दी गई। इसकी जानकारी अलेमी के परिवार ने शुक्रवार को दी। उनके बेटे रुहीन अलेमी ने बताया कि उनके पिता की रिहाई के लिए फिरौती के रूप में अपहरणकर्ताओं को 3.50 लाख डॉलर दिए गए थे। भुगतान के बावजदू अपहरणकर्ताओं ने उनकी हत्या कर दी और शव को सड़क पर छोड़ दिया। 

उन्होंने बताया कि उनके पिता की हत्या से पहले उन्हें बुरी तरह से यातनाएं भी दी गईं थी। इसके निशान उनके शरीर पर दिख रहे थे। तालिबान के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खोस्ती ने बताया आठ संदिग्ध अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों ने बल्ख प्रांत से अलेमी समेत तीन लोगों को अगवा किया था। सुरक्षाबलों ने अगवा दो लोगों को तो बचा लिया। लेकिन बचाव से पहले ही अलेमी को मार दिया गया था। अलेमी एक मनोचिकित्सक थे। वह मज़ार-ए-शरीफ़ के प्रांतीय अस्पताल में भी काम कर चुके थे। उनका एक निजी क्लिनिक भी था। यह मनोरोगियों के लिए शहर में बना पहला निजी क्लिनिक कहा जाता है।

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