अमेरिका में टैरिफ को लेकर टकराव और तेज हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि यह निर्णय “बेहद खराब तरीके से लिखा गया” है और अमेरिका के हितों के खिलाफ जाता है।
सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने ऐलान किया कि वह तत्काल प्रभाव से दुनियाभर के देशों पर लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते रहे हैं और अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने हितों की रक्षा करे।
सुप्रीम कोर्ट का 6-3 फैसला
दरअसल, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए बड़े ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया।
जजों ने कहा कि यह कानून राष्ट्रीय आपातकाल की स्थितियों के लिए बनाया गया है, लेकिन इसका उपयोग व्यापक व्यापारिक टैरिफ लगाने के लिए करना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियों का दायरा सीमित है और इसे राजस्व जुटाने या नियमित व्यापार नीति के उपकरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
फैसले के बाद नया दांव- धारा 122
हालांकि फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का सहारा लेते हुए अमेरिका आने वाले लगभग सभी आयातित सामानों पर 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय भुगतान संतुलन की समस्याओं के जवाब में 150 दिनों तक अधिकतम 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
अब ट्रंप ने इसे बढ़ाकर 15% कर दिया है। उनका कहना है कि यह कदम पूरी तरह कानूनी और परखा हुआ है।
“फैसले से मैं और मजबूत हुआ”
ट्रंप ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी शक्ति को कम नहीं करता, बल्कि और स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा,
“सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले ने प्रेसिडेंट की ट्रेड को रेगुलेट करने और टैरिफ लगाने की काबिलियत को कम करने के बजाय और ज्यादा ताकतवर और साफ कर दिया है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जिन उपायों को कोर्ट ने खारिज किया, उनकी जगह अब दूसरे कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया जाएगा और संभव है कि इससे ज्यादा राजस्व भी आए।
‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ पर दोहराया जोर
ट्रंप ने अपने फैसले को ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि आने वाले महीनों में उनका प्रशासन नए और कानूनी रूप से उचित टैरिफ तय करेगा और लागू करेगा। उनका तर्क है कि इन कदमों से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी निर्भरता घटेगी और अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ बढ़ाकर 15% करना वैश्विक व्यापार में नई अनिश्चितता पैदा कर सकता है। कई देशों की निर्यात नीति प्रभावित हो सकती है और जवाबी कार्रवाई की संभावना भी बढ़ सकती है।
फिलहाल यह साफ है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद व्हाइट हाउस टैरिफ नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब नजर इस बात पर होगी कि कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस नए कदम पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह कानूनी जंग आगे भी जारी रहती है।