हरियाणा व महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव और यूपी के उपचुनाव में कांग्रेस व सपा के बीच बढ़ी दूरियों का सियासी लाभ बसपा को मिलने की उम्मीद है। पार्टी तेजी से बदले राजनीतिक घटना पर नजर बनाए हुए है। यदि कांग्रेस और सपा के बीच बात नहीं बनी तो इसकी वजह से बनने वाले तीसरे मोर्चा का बसपा अंग बन सकती है। जानकारों की मानें तो वर्तमान में पार्टी को अपना वजूद बचाने और देश की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को बरकरार रखने के लिए इसकी जरूरत भी है। आपको बता दें कि बसपा के इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में उसे बहुमत मिला था। इससे पहले बसपा दूसरे दलों की मदद से सरकार बनाती रही, जिसका लाभ उसे लोकसभा चुनावों में भी मिलता गया।