पर्यटन स्थल हर्षिल में नएवर्ष का जश्न मनाकर पर्यटक कई टन कूड़ा और प्लास्टिक का कचरा छोड़ गए। इसलिए इन दिनों वहां पर मवेशी उस कूड़े को खा रहे है, जिससे कि उनको बिमारी होने का खतरा बना हुआ है। साथ ही यह वहां के प्राकृतिक धरोहर को भी प्रदूषित कर रहा है। लेकिन उसके बाद भी जिल पंचायत और प्रशासन की ओर से वहां से कूड़े के निस्तारण और स्वच्छता बनाए रखने के लिए किसी प्रकार का कदम नहीं उठाया गया है। नए वर्ष के स्वागत के जश्न और बर्फ के दीदार के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों से पर्यटक अच्छी संख्या में हर्षिल पहुंचे। वहां पर उन्हें बर्फ का दीदार तो नहीं हुआ, लेकिन नए वर्ष के जश्न के चलते पर्यावरण के प्रति अपनी संवेदनाएं भूल गए। वहां पर कई टन कूड़ा और प्लास्टिक का कचरा एकत्रित हो गया है। लेकिन हर्षिल क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का संचालन करने वाली जिला पंचायत की ओर से वहां पर किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी गई है। इस कारण उस कूड़े को मवेशी खाने को मजबूर हैं। प्लास्टिक खाने के कारण उनमें महामारी का खतरा बन रहा है। वहां जमा कूड़ा भी नहरों के माध्यम से सीधा भागीरथी और अन्य नदियों में जा रहा है। इससे हर्षिल क्षेत्र का पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। पूर्व प्रधान दिनेश रावत का कहना है कि जिला पंचायत की ओर से यात्रा सीजन के दौरान वहां पर सफाई कर्मचारियों की तैनाती रहती है। लेकिन सीजन समाप्त होने के बाद वहां पर स्वच्छता को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जाते है। जिला पंचायत और प्रशासन को जानकारी है कि अब नए वर्ष सहित बर्फबारी सहित हर्षिल में 12 माह का पर्यटन चल रहा है। इसलिए हर्षिल में 12 माह सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जाए। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी मोनिका भंडारी का कहना है कि सफाई कर्मचारियों को हर्षिल जाकर व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में दोबारा जानकारी लेती हूं।