ग्रीष्मकालीन धान पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (युवा) ने एसडीएम कार्यालय में किसान पंचायत की। किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांग का निस्तारण नहीं हुआ तो जिलाधिकारी कार्यालय और उसके बाद सीएम का घेराव किया जाएगा। आक्रोशित किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र एसडीएम को सौंपा। शासन-प्रशासन की ओर से ग्रीष्मकालीन धान पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (युवा) ने एसडीएम कार्यालय पर किसान पंचायत की। भाकियू (युवा) के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने कहा कि लगभग 20 दिन पहले मुख्यमंत्री ने किसानों को 31 मार्च तक ग्रीष्मकालीन धान बुआई के लिए कहा था। वहीं जिलाधिकारी ग्रीष्मकालीन धान बुआई पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दे रहे हैं। कहा कि इससे साफ है कि प्रशासन शासन की बात को नहीं मानता है। साथ ही सरकार किसान विरोधी है। वक्ताओं ने कहा कि किसानों से कहा जा रहा है कि धान के बजाए मक्के की खेती करें। कहा यदि वह मक्के की खेती करते हैं तो वह कहां जाकर बेचेंगे। किसानों ने कहा कि उन्होंने ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी तैयार कर दी है, इस आदेश से किसानों को नुकसान होगा। चेतावनी दी यदि किसी भी अधिकारी ने किसान की ग्रीष्मकालीन फसल को नष्ट करने का प्रयास किया तो उसका संगठन जमकर विरोध करेगा। आरोप लगाया शासन-प्रशासन ग्रीष्मकालीन धान की बुआई पर तो रोक लगा रहा है जबकि मिलें जो नदियों में गंदा और प्रदूषित पानी छोड़ रही हैं और सबसे अधिक पानी का दोहन कर रही हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं का जा रही है। पंचायत के बाद संगठन ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र एसडीएम अभय प्रताप सिंह को सौंपा।