जंगली मशरूम खाने से हुई नानी और पोती की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों का बचाव किया है। सीएमओ डॉ.एसएस नबियाल ने साफ तौर पर कहा कि जंगली मशरूम खाने से बीमार नानी और पोती का हरसंभव इलाज किया गया। लगातार जांच में दोनों का बीपी और पल्स रेट सही था। पहले दिन जांच और इलाज के बाद दवा देकर दोनों को घर भेजा गया। पेट दर्द की शिकायत पर दूसरे दिन अस्पताल पहुंची तो इन्हें भर्ती किया गया। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर दोनों को हायर सेंटर रेफर किया गया। जिला अस्पताल में भी चिकित्सकों ने जांच और इलाज कर दोनों को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। संयोग से हायर सेंटर में भी दोनों के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो उनकी मौत हो गई। बता दें कि मुनस्यारी में जंगली मशरूम खाने से नानी और पोती की बीते दिनों हल्द्वानी एसटीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मामले में परिजनों और क्षेत्र के लोगों ने दोनों की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग को ठहराते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आरोप है कि मुनस्यारी सीएचसी में स्वास्थ्य कर्मियों ने जंगली मशरूम खाने से तबियत बिगड़ने की जानकारी होने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। सामान्य इलाज कर उन्हें घर भेज दिया और तबियत ज्यादा बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल पहुंची तो दो दिन भर्ती करने के बाद हायर सेंटर रेफर कर जिम्मेदारी निभा दी गई। कर्मियों के समय रहते सही फैसला न लेने और समय पर हायर सेंटर रेफर न करने से दोनों की मौत हो गई।