पहाड़ों से पलायन का दर्द कोई नया नहीं है, कपकोट तहसील का पुड़कुनी गांव इस त्रासदी का जीता-जागता उदाहरण बनता जा रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर इस गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण अपने पुश्तैनी घरों में ताले जड़ने को मजबूर हैं। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतें यहां आज भी विलासिता बनी हुई हैं। पुड़कुनी गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क मार्ग का न होना है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में भी अगर कोई बीमार हो जाए, तो उसे डोली के सहारे करीब एक से दो किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज न मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती है। सड़क के अभाव में गांव तक राशन और निर्माण सामग्री पहुंचाना भी बेहद खर्चीला काम है। गांव के बीचों-बीच बने कई मकान अब खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं। गांव में 10 साल पहले तक करीब 400 परिवार रहते थे। लेकिन अब महज 150 परिवार ही बचे हुए हैं। दीवारों पर उग आई घास और लटकते ताले साफ बताते हैं कि यहां की रौनक सुनसानी में बदल गई है। शिक्षा के बेहतर विकल्प न होने से युवा पीढ़ी शहरों की ओर रुख कर चुकी है।