बर्फीली हवाओं, खुले मैदानों और सीमित संसाधनों के बीच अगर किसी टीम ने अपने सपनों को जिंदा रखा है, तो वह लद्दाख की सीनियर वॉलीबॉल टीम है। जहां न इनडोर स्टेडियम हैं, न आधुनिक ट्रेनिंग सुविधाएं, वहां के खिलाड़ी सिर्फ अपने जज्बे और मेहनत के भरोसे 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप तक पहुंचे हैं। वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में उतरती यह टीम सिर्फ एक मैच नहीं खेल रही, बल्कि देश के खेल तंत्र को यह याद भी दिला रही है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि जज्बे, संघर्ष और उम्मीद की कहानी है। सिगरा स्टेडियम के इनडोर हाल में कोर्ट नंबर दो पर मैच से पूर्व अभ्यास सत्र में लद्दाख वॉलीबाल टीम के कोच अब्दुल हुसैन ने अमर उजाला से बात की। उन्होंने अपने अनुभव और टीम के गेम प्लान पर चर्चा की। बताया कि हमारे यहां एक भी इनडोर स्टेडियम नहीं है। खिलाड़ी खुले मैदानों में, ठंड और तेज हवाओं के बीच अभ्यास करते हैं। इसके बावजूद ये लड़कियां नेशनल खेलने का सपना देखती हैं और उसे पूरा भी कर रही हैं।