काशी में होली की खुमारी ऐसी चढ़ी कि साधु-संन्यासी में इसमें रम गए। साध्वियों ने भी होली गीत गाकर मठ-मंदिरों का उल्लास बढ़ा दिया। गुरुवार को होली खेले कान्हा, होली खेले रसिया... गीत गाते ही घाट पर लोग भी थिरकने लगे। ढोलक और मंजिरे के साथ एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए गए। इस बीच एक युवा संत ने बांसुरी की प्रस्तुति दी।