श्री रामलीला समिति शिवपुर द्वारा मैदान चल रहा रामलीला में शनिवार को अहिल्या तरण श्री गंगा जी का दर्शन जनकपुर विश्राम की लीला मंचन हुआ।अयोध्या के राजा दशरथ की आज्ञा मिलने के बाद महर्षि विश्वामित्र राम और लखन दोनों भाइयों को लेकर चरित्रवन को रवाना होते हैं। इस क्रम में मार्ग में माता गंगा का दर्शन पाकर भगवान अपने आपको धन्य महसूस करते हैं। इसी क्रम में रास्ते में गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का स्थान मिलता है। जहां ऋषि के श्राप से माता अहिल्या पत्थर में तब्दील नजर आती हैं। यहां ऋषि के आदेश पर भगवान राम अहिल्या का अपने चरण रज से उद्धार कर तब जनकपुर को प्रस्थान होते हैं। आज के प्रसंग में यह दिखाया जाता है कि सब कुछ ईश्वर की रची रचना के आधार पर ही पूर्व निर्धारित योजना के अनुसर एक के बाद एक कर घटित होता जा रहा है। जिसके लिए भगवान श्रीराम ने मानव स्वरूप में धरती पर राजा दशरथ के आंगन में अवतार लिया था। इस दौरान अहिल्या उद्धार के क्रम में ही गंगा तट पर जाकर पांडवों से अपनी वंशावली का जिक्र सुनते हैँ। तथा गंगा माता का दर्शन कर जनकपुर की पहले अमराई में प्रवेश कर विश्राम करते हैं। वहां बाग के माली से उनकी मुलाकात होती है। जिसके माध्यम से राजा जनक को भगवान के उनके राज्य में आगमन की सूचना मिलती है। इस दौरान राजा जनक द्वारा भगवान श्रीराम का भव्य स्वागत किया जाता है।