103वें संकट मोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा पर पांच मुस्लिम कलाकारों ने अपने शास्त्रीय सुरों से हनुमत वंदना की। वहीं पहली प्रस्तुति में महावीर का आंगन कभी शास्त्रीय संगीत की फैक्ट्री तो भी वेस्टर्न का लैब लगा। आंगन में ड्रम, बाल्टी, घंट, थाली, परात के साथ पखावज और मेंडोलिन की संगत ने 'रघुपति राघव राजाराम' और 'गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो' गाने को नया अवतार दे दिया और साउथ इंडो-वेस्टर्न स्टाइल के साथ भक्तों को बरसों पुराने गाने का नया और आक्रामक वर्जन सुनने को मिला। जैसे ही इस धुन की गूंज उठी तो संकट मोचन परिसर में जो जहां था वहीं झूमना शुरू कर दिया। वहीं इस दौरान पंडित शुभ महाराज के तबला वादन पर एक विदेशी श्रोता मस्त होकर नाचता रहा।