अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो काशी बाबा विश्वनाथ संग रामधुन में मगन नजर आई। मन और तन राम रंग में रंगा था। हर ओर रामनाम का उत्सवी रंग बिखरा। घर से देवालय तक उमंग और उल्लास का आलम था। सड़कों और गलियों में रामभक्तों का हुजूम उमड़ा था तो चहुंओर रामनाम का पताका लहराया और गगनभेदी रामनाम का शंखनाद होता रहा।