केवाल गांव में सेप्टिक टैंक में डूबने से दो बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया। घटना के बारे में जिसने भी सुना स्तब्ध रह गया। कुछ देर पहले तक बच्चों की खिलखिलाहट से जो आंगन गुलजार थे, वहां परिजनों के रोने-बिलखने की आवाज गूंज रही थी। लाड़ले के शव से लिपटकर बिलखती मां और मासूम बहनों की आंखों से बहते आंसू सबके हृदय को बेध रहे थे। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों के शव का अंतिम संस्कार हुआ। राधेश्याम का पुत्र शौर्य तीन बहनों का इकलौता भाई था। घर में वह सबसे छोटा था, इसलिए चहेता भी था। काफी मन्नतों के बाद हुए पुत्र से परिवार के सभी सदस्यों का विशेष लगाव था। उसकी हर फरमाइश पूरी होती थी। मंगलवार को भी वह घर के बाहर जाकर खेलने की जिद करने लगा तो परिजन उसे रोक न सके। पास में ही होने के कारण उन्हें भरोसा था कि वह उस पर नजर रख सकेंगे, मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। किसी को कुछ सोचने-समझने का मौका ही नहीं मिला। देखते ही देखते ही दोनों बच्चे सेप्टिक टैंक में गिरे और बाहर निकालने से पहले ही उनकी मौत भी हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक गिरने से ज्यादा चोट बच्चों के सिर पर टैंक के ऊपर रखे पत्थर के पटिया से पहुंची थी। मासूम बच्चों के सिर पर भारी पत्थर से चोट पहुंचते ही वह बेहोश हो गए, फिर होश में नहीं आए। उधर, अंकित के परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। उसके परिवार में मां के अलावा तीन बहनें हैं। घटना के बाद से पूरे गांव में मातम छाया रहा। पास-पड़ोस के लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने में जुटे रहे।