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VIDEO: ओडीओसी में नैमिषारण्य की हनुमानगढ़ी का लड्डू बनेगा पहचान, शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव

सीतापुर। नैमिषारण्य स्थित हनुमानगढ़ी के लड्डू को एक जनपद एक व्यंजन के तहत चयनित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर ने इसके लिए खास प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एक जनपद एक व्यंजन से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा जाएगा। उन्हें इसका प्रशिक्षण देकर इसके लिए विशेष आउटलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें से एक आउटलेट को प्रस्तावित नैमिष हाट में भी खोला जाएगा। डीएम डॉ राजा गणपति आर ने हनुमानगढ़ी के लड्डू को एक जनपद एक व्यंजन योजना के तहत चयन करते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा है। अब इस नैमिषारण्य के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी लड्डू को जल्द ही एक विशेष पहचान मिल जाएगी। इस स्वादिष्ट और पारंपरिक लड्डू को भौगोलिक संकेत (जीआई इंडीकेटर) टैग देने की प्रक्रिया भी की जाएगी। इसकी विशिष्टता को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलेगी। इस पहल के साथ ही स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। ''वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूजीन'' (ओडीओसी) योजना के तहत नैमिषारण्य के हनुमानगढ़ी लड्डू को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है।अब, इस योजना के माध्यम से, जिले की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सीधे तौर पर हनुमानगढ़ी लड्डू के उत्पादन से जोड़ा जाएगा। लड्डू निर्माण के प्रशिक्षण और विपणन की नई राह ओडीओसी योजना के तहत समूह की महिलाओं को लड्डू बनाने की कला में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले लड्डू बनाने की बारीकियों को सिखाएगा। प्रशिक्षण के साथ-साथ, महिलाओं को लड्डू बेचने के लिए विशेष आउटलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल उनके उत्पादों को एक निश्चित बाजार मिलेगा, बल्कि वे सीधे श्रद्धालुओं तक पहुंच सकेंगी। सीतापुर से बंगाल व दक्षिण भारत में प्रसिद्ध है लड्डू लड्डू निर्माण से जुड़े कपिल ने बताया कि इसे शुद्ध बेसन से बनाया जाता है। यह पंद्रह से बीस दिनों तक सुरक्षित रहता है। यह विशेष रूप से बंगाल व दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय है। साथ ही विदेशी श्रद्धालुओं को भी लड्डू खूब भाता है। एक दिन में करीब एक हजार किलोग्राम लड्डू तैयार होता है। एक किलोग्राम लड्डू का मूल्य तीन सौ रुपये है। इसे हनुमान महाप्रसाद के नाम से जाना जाता है। बताया कि बजरंगबली को लड्डू काफी प्रिय है। इसे चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालु चंद्रप्रताप, बबलू व अन्य ने बताया कि वह पांच साल से हनुमान गढ़ी आ रहे हैं। विशेष रूप से इसे चढ़ाने के साथ घर पर भी ले जाते हैं। 1990 में मां ने शुरू किया था हनुमान महाप्रसाद, यह गौरव का क्षण हनुमान गढ़ी पीठाधीश्वर 1008 महंत पवन दास महाराज का कहना है कि यह श्री हनुमान महाराज का दक्षिणमुखी सिद्धपीठ है। हम लोग तीसरी पीढ़ी से बजरंगबली का इस स्थान पर पूजन करते आए हैं। यहां बजरंग बली को लड्डू का भोग लगता है। इसे हनुमान महाप्रसाद के नाम से जाना जाता है। इसे मेरी माता ने बिस्सू महाराज की प्रेरणा से वर्ष 1990 में शुरू किया था। शुद्धता लड्डू की पहचान है। प्रतिदिन सवा किलो लड्डू उनको चढ़ाया जाता है। लड्डू का चयन एक जनपद एक व्यंजन के तहत किया गया है। यह गौरव का क्षण है। शासन प्रशासन को धन्यवाद देता हूं।

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