श्रावस्ती/इकौना/कटरा/जमुनहा। छठ महापर्व में के तीसरे दिन सोमवार को व्रती महिलाओं ने संध्या अर्घ देकर छठी मईया की पूजा की। इस दौरान फल व अन्य सामग्रियों से भरे डाल लेकर पुरुषों ने भी पूजा में प्रतिभाग किया। जिले में विभिन्न स्थानों पर छठ महापर्व का आयोजन किया गया। इस दौरान इकौना क्षेत्र के सीताद्वार झील पर शाम चार बजे से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी। सूर्यास्त होते ही झील के घाट पर व्रती महिलाएं पतियों के साथ छठ माईया की पूजा की। छठ पूजा में संध्या अर्घ का विशेष महत्व है। महिलाएं व्रती तालाब व झील के घाटों पर एकत्रित होकर शाम को अस्ताचलगामी सूर्य भगवान को अर्घ देकर पूजा की। साथ ही बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना आदि को रखकर सूर्य देव व छठ मईया को अर्पित किया। इसी तरह से भिनगा के सर्वामाई धाम पर बने तालाब के घाट पर महिलाओं ने सूर्य देव को अर्घ देकर पूजा की। वहीं, जमुनहा क्षेत्र के राप्ती नदी घाट पर भी महिलाओं ने छठ मईया की पूजा की। एसएसबी कार्यालय परिसर में हुआ छठ पूजा का आयोजन भिनगा स्थित 62वीं वाहिनी मुख्यालय पर बने तालाब के घाट पर छठ महापर्व का आयोजन किया गया। इस दौरान वाहिनी की महिला सदस्यों ने पारंपरिक वेशभूषा में विधि-विधान से ढलते सूर्य देव को अर्घ देकर पूजा की। साथ ही छठी मइया के भजन और आरती से कैंप परिसर में भक्तिमय माहौल बन गया। इस दौरान उप कमांडेंट पीयूष सिन्हा ने कहा कि छठ पर्व भारतीय संस्कृति की एकता, शुद्धता और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि परिवार और समाज को भी एक सूत्र से जोड़ता है। इस मौके पर उप कमाडेंट गोबर्धन पुजारी, सहायक कमांडेंट अमित शर्मा आदि मौजूद रहे।