मुंशीगंज-डलमऊ राजमार्ग स्थित बेंद नाले पर निर्माणाधीन पुल के पास बने बाईपास से होकर प्रतिदिन करीब 30 हजार लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर तय करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि भारी वाहनों की वजह से आवागमन ठप रहता है। धूल उड़ऩे की वजह से लोग बेहाल हैं। पानी का छिडक़ाव तक नहीं किया जाता। खास बात ये है कि लोक निर्माण विभाग की ओर से इस मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन बंद कराने के लिए कई बार प्रशासन को लिखापढ़ी की गई। बावजूद भारी वाहनों के आवागमन पर रोक नहीं लगाई गई। बेंद गांव के पास नाले पर दो करोड़ से पुल का निर्माण कराया जा रहा है। यह मार्ग फतेहपुर, बांदा जिले को जोड़ता है। निर्माणाधीन पुल के पास वाहनों के आवागमन के लिए बाईपास बनाया गया है। बाईपास भी मानक के विपरीत बनाया गया है। निर्माण कार्य के चलते भारी वाहनों का डायवर्जन डलमऊ के मुराईबाग से लालगंज होकर रायबरेली के लिए किया गया है। प्रतापगढ़ और प्रयागराज जाने वाले वाहनों का डायवर्जन मुराईबाग, गदागंज, ऊंचाहार की तरफ से किया गया है। बावजूद दिन और रात मुंशीगंज-डलमऊ राजमार्ग से भारी वाहन निकलते हैं। इस वजह से मुंशीगंज-डलमऊ पर लोगों को सफर करना मुश्किल हो रहा है। मंगलवार को भी बाईपास पर सुबह सात बजे से सुबह 10 बजे तक आवागमन ठप रहा। ग्रामीण पूर्णमासी व अर्जुन सिंह बताते हैं कि भारी वाहनों की वजह से हादसे हो रहे हैं। लोग जान गंवा रहे हैं। बावजूद इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डलमऊ पुलिस की लापरवाही पड़ रही भारी फतेहपुर से रायबरेली की तरफ आने वाले भारी वाहनों का डायवर्जन लालगंज-रायबरेली हाईवे से किया गया है। हाईवे पर ऐहार के पास टोल बना है। टोल टैक्स बचाने के चक्कर में भारी वाहन मुंशीगंज-डलमऊ राजमार्ग से निकल रहे हैं। इन भारी वाहनों के आवागमन को रोकने की जिम्मेदारी डलमऊ पुलिस की है। बावजूद पुलिस इस पर ध्यान नहीं देती। नतीजतन हर दिन जाम लगता और लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ता है।