पीलीभीत के घुंघचाई क्षेत्र की मटेहना कॉलोनी नंबर एक निवासी 16 वर्षीय प्रीती कुमारी को तीन साल की उम्र में बीमारी ने दिव्यांग बना दिया। उसके दोनों हाथों ने काम करना बंद कर दिया। तब उसने पैरों को ही हाथ बना लिया। छह साल की उम्र में ही उसने पैरों से ही लिखना और घर का काम करना शुरू कर दिया। रोजाना स्कूल जाने के साथ घर में मां का घरेलू कामों में हाथ प्रीती बंटा रही है। प्रीती इस साल हाईस्कूल की परीक्षा दे रही है। प्रीती को पैर से लिखता देख शिक्षक और छात्र हैरान रह जाते हैं। प्रीती का शिक्षक बनने का सपना है। प्रीती के पिता अशोक कुमार किसान हैं। मां गृहिणी हैं।