मंदिर श्री महाकालेश्वर धाम में आयोजित श्री राम चरितमानस कथा के चौथे दिन साध्वी पुष्पा रामायणी ने प्रभु श्रीराम के विवाह का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण फुलवारी में भ्रमण कर रहे थे। उसी समय माता सीता भी अपनी सखियों के साथ गौरी पूजन के लिए वाटिका में आती हैं। माता सीता गौरी मां से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें श्रीराम के रूप में अपना पति प्राप्त हो। राजा जनक ने सीता स्वयंवर के लिए एक बड़ी शर्त रखी थी जो भी वीर भगवान शिव के विशाल धनुष पिनाक को उठा कर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान राम उठते हैं और सहज ही शिव धनुष उठा लेते हैं, प्रत्यंचा चढ़ाने के दौरान धनुष टूट जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते हुए नजर आए। साथ ही श्रीराम के भजनों पर जमकर झूमे। मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस मौके पर ओमसंस परिवार, सुनील कुमार, सुधीर कुमार, राम, गौरी जैन, राजीव अग्रवाल मल्लू आदि मौजूद रहे। संवाद