अब्दुल्लापुर गांव में सोमवार की सुबह करीब साढ़े चार बजे जब एक साथ छह शव पहुंचे तो गमगीन घरों की सिसकियां चीख पुकार में बदल गईं। सन्नाटे में डूबी गलियों की खामोशी बच्चों, महिलाओं के विलाप से भर गई। कुछ देर बाद सुमन के शव को उसके परिजन उसकी ससुराल मधपुरी ले गए और अब्दुल्लापुर में दोपहर करीब एक बजे पांच अर्थियां एक साथ उठीं तो हर आंख नम हो गई। गांव के पास ही पांचों को अंतिम संस्कार किया गया। हादसे के बाद से ही अब्दुल्लापुर गांव गम में डूबा हुआ था। रविवार की रात भर लोग सो नहीं पाए थे। शवों के आने का इंतजार किया जा रहा था। वहीं, भीषण हादसे में जान गंवाने वाली सीमा, आरती, अभय, संजू, अनाया और सुमन के शव का सोमवार की सुबह चार बजे तक पोस्टमार्टम चला। इसके बाद सभी छह शवों को लेकर लोग गांव पहुंचे तो वहां पहले ही शोक संवेदना व्यक्त करने वाले बड़ी संख्या में एकत्र थे। वाहनों से एक एक शव को उतारा गया। इसके बाद घरों में ले गए तो महिलाएं बिलखने लगी। यहां पहुंचे लोगों की आंखें नम हो गईं। कुछ जिम्मेदार लोग अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे। दोपहर की एक बजे एक साथ तीन घरों से पांच अर्थियां उठीं तो हर किसी का मन बोझिल और आंख नम थी। गमगीन माहौल में रामगंगा नदी के किनारे स्थित शमशान घाट पर पांच शवों को अंतिम संस्कार किया गया है। इनमें से सीमा, आरती और संजू का दाह संस्कार किया गया जबकि जबकि अनाया और अभय को दफन किया गया है। सुमन का अंतिम संस्कार उसकी ससुराल मधपुरी गांव के श्मशान में किया गया।