वृंदावन में उत्तर भारत के दक्षिण भारतीय शैली के विशालतम रंगनाथ मंदिर का दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव वैदिक मंत्रोचार और पूजा पाठ के साथ शुरू हुआ। ब्रह्मोत्सव के पहले दिन सुबह के समय भगवान रंगनाथ माता गोदा (लक्ष्मी जी) के साथ सोने से बनी पुण्य कोटि में विराजमान हुए। मंदिर से शुरू हुई सवारी गाजे बाजे के साथ बड़े बगीचा पहुंची, जहां कुछ देर विश्राम करने के बाद सवारी वापस मंदिर आई। ब्रह्मोत्सव की शुरुआत से पहले भगवान रंगनाथ के सेनापति विष्वक्सेन जी का आह्वान पूजन अर्चन किया। पूजन अर्चन के बाद उनको चांदी से बनी पालकी में विराजमान किया गया। इसके बाद परम्परागत वाद्य यंत्रों की ध्वनि के साथ सवारी शुरू की गई। विष्वक्सेन जी ब्रह्मोत्सव के लिए की गयी व्यवस्थाओं का जायजा लेने चांदी की पालकी में विराजमान होकर निकले।