भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के स्वरूपों पर जगह-जगह फूलों की वर्षा हो रही थी। भक्त अपने ठाकुरजी को नमन कर रहे थे। डोला के पीछे हाथों में हरे बांस की छड़ी लेकर गोपियां चलती नजर आईं। विभिन्न समुदायों की रसिया टोली गोकुल की कुंज गलियों में रसिया गायन करती हुई निकल रही थीं। नंद भवन से डोला मुरली घाट पहुंचा जहां भगवान के दर्शन के लिए पहले से ही श्रद्धालुओं का हुजूम मौजूद था। भजन, कीर्तन, रसिया गायन के बीच छड़ी मार होली की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं ने जमकर छड़ीमार होली का आनंद लिया।