प्रगति की रफ्तार ने प्रकृति की चादर छीन ली है। साढ़ से जीटी रोड तक का वह मार्ग, जो कभी घने और छायादार पेड़ों से ढका रहता था, आज पूरी तरह उजाड़ नजर आ रहा है। निर्माणाधीन फोरलेन परियोजना के चलते मार्ग के किनारे लगे हजारों पेड़ों को काट दिया गया है। कभी राहगीरों को चिलचिलाती धूप से बचाने वाली यह 'हरी सुरंग' अब केवल धूल और ठूंठों के मैदान में तब्दील हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से आवागमन तो सुगम होगा, लेकिन जिस प्राकृतिक सौन्दर्य और ठंडक को उन्होंने खोया है, उसकी भरपाई में दशकों लग जाएंगे। निर्माण कार्य के बीच अब पूरा इलाका वीरान और बेनूर सा महसूस होने लगा है।