कानपुर-शुक्लागंज को जोड़ने वाला नवीन गंगापुल लोकार्पण के मात्र 11 साल में ही जर्जर हो गया है। कार्यदायी एजेंसी ने पुल की मियाद सौ साल बताई थी। पुल की सतह पर कई जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनमें सरिया तक दिखने लगी है। भारी वाहनों के लगातार गुजरने और लोक निर्माण विभाग की अनदेखी के कारण पुल की स्थिति गंभीर बनी हुई है। यह पुल सितंबर 2015 में तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जनता को समर्पित किया था। इसका उद्देश्य शुक्लागंज के लोगों को जाम से निजात दिलाना और पुराने गंगापुल पर वाहनों का भार कम करना था। हालांकि, साल 2023 में पुराना गंगापुल भी जर्जर होने के कारण बंद कर दिया गया। इसके बाद नवीन गंगापुल पर कानपुर-शुक्लागंज के बीच लाखों वाहनों का एकतरफा भार पड़ने लगा। जिला प्रशासन उन्नाव ने नवीन पुल से भारी वाहनों के गुजरने पर रोक लगाई है लेकिन डंपर, भारी ट्रक और ट्राला जैसे भारी वाहन लगातार यहां से गुजर रहे हैं। इसी कारण पुल कमजोर पड़ा और अब बीचों-बीच दो जगहों पर गड्ढे हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पीडब्लूडी केवल सामान्य पैचवर्क करके खानापूर्ति करता है। जबकि पुल की दो लेयर की पूरी सड़क की सतह बदली जानी चाहिए। स्थानीय लोग पीडब्लूडी पर लगातार अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। उनकी आशंका है कि पुल की निचली सतह में दरार आ गई होगी। यह स्थिति कभी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। पीडब्लूडी एक्सईएन एचडी अहिरवार ने बताया कि हाल ही में कराया गया डामर का पैचवर्क भारी वाहनों के गुजरने से उखड़ गया है। यदि पुल मार्ग पर कुछ दिनों के लिए यातायात रोका जाए, तो सही कार्य कराया जा सकता है।