सरसौल विकासखंड के नौगवा गौतम के रहने वाले शहीद शैलेंद्र ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। शैलेंद्र 23 जून 2024 को सुकमा नक्सली हमले में शैलेंद्र शहीद हुए थे। उनकी स्मृति में स्मृति द्वार और सड़क नामकरण की मांग अब तक अधूरी है। शैलेंद्र की मां बिज्मा देवी और भाई नीरज ने कहा कि दलित परिवार होने के कारण सरकार और जनप्रतिनिधि उनकी सुनवाई नहीं कर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य स्थानों पर शहीदों के सम्मान में स्मृति द्वार और पार्क बने, लेकिन उनके बेटे की शहादत को दो वर्ष बाद भी उचित सम्मान नहीं मिला। सरसौल क्षेत्र के वरिष्ठ कवि धीरपाल सिंह धीर ने शाहिद शैलेंद्र कुमार पर कविता लिखते हुए कहा की शहादत पर भी राजनीति होती है इस राजनीति के कारण 2 वर्ष बीतने को है लेकिन अभी तक शहीद के नाम का स्मृति द्वार तथा सड़क का नामकरण नहीं हो पाया है।