नव वर्ष आगमन के अवसर पर बुधवार को श्री गुरु सिंह सभा कानपुर की ओर से मोतीझील ग्राउंड में नवां साल गुरु दे नाल विशेष कीर्तन दरबार आयोजित किया गया। इस आयोजन में समूह सिख और गुरु नानक नाम लेवा संगत ने सहयोग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को होटलों और क्लब संस्कृति से दूर रखते हुए धर्म और अध्यात्म की ओर आकर्षित करना था। कानपुर। बुधवार को नव वर्ष आगमन को समर्पित महान कीर्तन दरबार “नवां साल गुरु दे नाल” विशेष कीर्तन दरबार का आयोजन श्री गुरु सिंह सभा कानपुर की ओर से समूह सिख एवं गुरु नानक नाम लेवा संगत के सहयोग से मोतीझील ग्राउंड में किया गया। यहां श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के सानिध्य में सन 2025 को अलविदा और नव वर्ष आगमन का स्वागत गुरुवाणी कथा कीर्तन के माध्यम से किया गया। “नवां साल गुरु दे नाल” कीर्तन समागम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को होटलों और क्लब संस्कृति की चका चौंध से दूर करने और धर्म अध्यात्म की तरफ आकर्षित कराना रहा। युवा पीढ़ी के लोग लम्बी कतारों में जुगो जुग अटल श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के समक्ष माथा टेकने के लिए अपनी बारी का इंतजार "वाहेगुरू वाहेगुरू" के जाप के साथ कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत रहरास साहिब" के पाठ से हुई। गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब चौक के हजूरी रागी हरविंदर सिंह, भूपिंदर सिंह गुरदासपुरी, कुलदीप सिंह राजा ने गुरुवाणी कीर्तन की अमृत वर्षा ने भावपूर्ण स्वरों में शबद “गनिव तेरी सिफत सच्चे पातशाह”, “सुनी अरदास स्वामी मेरे, सरब कला बन आई” तथा “सतगुर होय दयाल तां श्रद्धा पुरिये”। सिख फुलवारी के बच्चों ने कीर्तन गायन किया। तत्पश्चात सिख फुलवारी के गुरमत प्रश्नोत्तरी के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ के हजूरी रागी सुरजीत सिंह खालसा ने "जगमग नूर है,जगमग नूर है, साध संगत अस्थान जगमग नूर है" , "सो क्यू बिसरै जिनी सब किछु दीआ, सो क्यू बिसरै जि जीवन जिआ" से संगत को गुरु यश से जोड़ा। कीर्तन समागम की समाप्ति अरदास से हुई। अरदास में बीते साल के लिए गुरु का शुक्राना और नए साल में सभी के सुख शांति की अरदास की गई। यहां स. हरविंदर सिंह लॉर्ड, सुखविंदर सिंह भल्ला लाडी, सुरजीत सिंह लॉर्ड, मोहन सिंह झास, मीतू सागरी, हरजिंदर सिंह, हरमिंदर सिंह लोंगोवाल, करमजीत सिंह, गुरुदेव सलूजा, दया सिंह गांधी, अमनजोत सिंह रौनक, मनमीत सिंह राजू पहलवान, जसबीर सिंह सलूजा, सुरिंदर सिंह चावला कालू, सतनाम सिंह सूरी, जयदीप सिंह राजा आदि उपस्थित थे। संचालन महेन्द्र सिंह भाटिया जैक वालों ने किया।