रावण का वध देवताओं या गंधर्वों के लिए संभव नहीं था, इसलिए भगवान विष्णु को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में मानव अवतार धारण करना पड़ा। भगवान कभी जन्म नहीं लेते, वे सृष्टि में अपनी लीलाओं के माध्यम से अवतरित होते हैं और मानव का कल्याण करते हैं। यह बातें रविवार को चार खंबा कुआं के निकट कालपी रोड पर स्थित श्री कृपा धाम मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन आचार्य कृष्ण गोपाल सुवेदी महाराज ने भक्तों से कही। उन्होंने माता कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी के माध्यम से प्रभु अवतरण की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि तीनों माताओं को वरदान स्वरूप प्राप्त फल से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का अवतरण हुआ, जिन्होंने लोककल्याण के लिए अपनी दिव्य भूमिकाएं निभाईं। महाराज ने कहा कि श्रीराम जोड़ने वाले हैं, जबकि रावण ने सदा विभाजन किया। श्रीराम ने जनक और दशरथ के कुल को जोड़ा, समुद्र पर सेतु बनाकर एक देश को दूसरे देश से जोड़ा, जबकि रावण ने समाज, वेद, शास्त्र और यज्ञशालाओं को तोड़ा। रावण के जन्म और तपस्या का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि महाराज प्रताप भानु को प्राप्त श्राप के कारण वह अगले जन्म में रावण के रूप में उत्पन्न हुए। पुलस्त्य कुल में जन्म लेकर उन्होंने दस हजार वर्षों तक घोर तप किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें चार वेद और छह शास्त्रों का गहन ज्ञान प्राप्त हुआ, इसी कारण वे ‘दशानन’ कहलाए। कथा के दौरान श्रीराम जन्मोत्सव के भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कथा के दौरान मुख्य यजमान सुनील कपूर, सपना कपूर, दिशा कपूर, श्रुति कपूर, आचार्य प्रमोद तिवारी, व्यवस्थापक राजीव चतुर्वेदी, पंकज झा समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।