भीतरगांव इलाके के कई गांवों में कुम्हड़े की फसल तैयार है, लेकिन खरीददारों के न आने से कुम्हड़ा का बड़ा फल खेतों में ही पड़ा है। कम लागत में ज्यादा मुनाफे के लिए कुम्हड़े की खेती करने वाले किसान इस बार फंस गए हैं। पेठा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुम्हड़े की पैदावार भीतरगांव इलाके में इस बार जमकर हुई, लेकिन भाव गिरने से फसल की लागत तक नहीं निकल पा रही। पिछले साल कुम्हड़ा आठ सौ से नौ सौ रुपये क्विंटल तक बिका था, लेकिन इस बार ढाई सौ से तीन सौ तक में कोई नहीं पूछ रहा है। समय से खेत खाली न होने पर किसानों को गेहूं बुवाई में लेट होने की आशंका है।