कानपुर मेंजीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राकेश त्रिपाठी ने बताया कि अनडिसेन्डेड टेस्टीज के बालरोगी अक्सर इलाज के लिए देरी से आते हैं, जिससे उनमें बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समस्या का समय पर इलाज, यानी सर्जरी बहुत जरूरी है।