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आधुनिकता की दौड़ में आज भी बुजुर्गों के हाथों में जीवित है टोकरी बुनने की कला

जहां एक तरफ प्लास्टिक और मशीनी सामानों ने बाजार पर कब्जा कर लिया है, वहीं कुछ बुजुर्ग कारीगर आज भी अपनी मेहनत और हुनर से बांस की पतली लकड़ी से झौवा और टोकरी बनाने की पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं। भीतरगांव ब्लॉक के गौरीककरा गांव में एक बुजुर्ग किसान बहुत ही बारीकी से लकड़ी से घंटों की मेहनत के बाद बेहद टिकाऊ टोकरियां और झौवे तैयार करते हैं।

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