कानपुर के बिठूर स्थित वाल्मीकि आश्रम में एक अति प्राचीन पीलू का वृक्ष मौजूद है। पुजारियों और मान्यताओं के अनुसार, इसी पवित्र वृक्ष के नीचे बैठकर महर्षि वाल्मीकि ने 'मरा-मरा' का जाप करते हुए कठोर तपस्या की थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।