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विधिक साक्षरता शिविर में स्कूल के बच्चों को दी खास जानकारी

अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 09 May 2025 08:51 PM IST

खाना पट्टी स्थित मां शारदा बालिका विद्यालय पर शुक्रवार को आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय/ सचिव पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रशांत सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार के एक्शन प्लान 2025-26 के निर्देशानुसार ‘बालश्रम, शिक्षा का अधिकार एवं बालकों के कल्याण के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं’ के विषय पर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री सिंह ने बताया कि एक भारतीय नागरिक के रुप में हममे से अधिकांश लोग राष्ट्र के प्रति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरुक है। भारतीय कानून में छात्र शब्द का कोई वैधानिक अर्थ परिभाषित नहीं किया गया है। भारत के नागरिक के लिये उपलब्ध सभी कानूनी अधिकार सामान्य रुप से छात्रों के लिये उपलब्ध है। स्कूली शिक्षा बच्चों को स्कूलों में शारीरिक दंड नहीं दिया जाना चाहिये और उन्हें स्वतंत्रता और गरिमा के माहौल मुफ्त में शिक्षा प्राप्त करना चाहिये। 14 वर्ष से कम आयु वर्ग के छात्रों को कोई सजा नहीं। यदि किसी छात्र को एक विद्यालय से निष्कासित कर दिया जाता है तो एक-दूसरे विद्यालय में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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