भारत की स्वतंत्रता के लिए हुए पहले संग्राम में ऐतिहासिक इबारत लिखने वाले रुईया के राजा नरपति सिंह के शौर्य दिवस पर कल मुख्यमंत्री आएंगे। निश्चित रूप से आजादी के महान योद्धा राजा नरपति सिंह की वीरता पर चर्चा होगी। अफसोस यह कि राजा नरपति सिंह के नाम पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का कोई संरक्षित स्थल नहीं है, लेकिन रुईया से चार किलोमीटर दूर राजा नरपति सिंह के हाथों मारे गए अंग्रेेजी सेना के ब्रिगेडियर एड्रियन होप की कब्र संरक्षित स्मारक है। इसी वजह से इसकी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। वर्ष 1857 में अंंग्रेजों के खिलाफ पहली बार भारत में क्रांति हुई थी। इस क्रांति में रुईया के राजा नरपति सिंह रैकवाड़ की बड़ी भूमिका थी। राजा नरपति सिंह और उनकी सेना से निपटने के लिए उन दिनों का जिला मुख्यालय रहा मल्लावां में महारानी विक्टोरिया के ममेरे भाई ब्रिगेडियर एड्रियन होप, लेफ्टिनेंट डगलस, कर्नल हडसन, जरनल बालहोल के नेतृत्व में अंग्रेजों की सेना आई।