अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग के जनक माने जाने वाले महर्षि पतंजलि की तपोस्थली और जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध वजीरगंज क्षेत्र का कोंड़र आश्रम एक बार फिर चर्चा में है। आस्था और लोकमान्यताओं से जुड़े इस पवित्र स्थल को योग तीर्थ के रूप में विकसित करने की मांग लगातार तेज हो रही है। मान्यता है कि यहीं महर्षि पतंजलि ने अपने शिष्यों को योग, व्याकरण और दर्शन का ज्ञान दिया था तथा यहीं से जुड़ी वह प्रसिद्ध कथा भी प्रचलित है, जिसमें शिष्यों द्वारा पर्दा हटाकर देखने के बाद महर्षि पतंजलि अदृश्य हो गए थे। सनातन धर्म परिषद के अध्यक्ष डा. स्वामी भगवदाचार्य ने बताया कि सनातन परंपरा में महर्षि पतंजलि को शेषनाग का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि वह अपने शिष्यों को एक पर्दे के पीछे से ज्ञानोपदेश देते थे। उनके दिव्य स्वरूप को देखने की अनुमति किसी को नहीं थी। किंवदंती के अनुसार लगातार कई दिनों तक चल रहे उपदेश के दौरान कुछ शिष्यों के मन में जिज्ञासा जागी और उन्होंने पर्दे के कोने से झांककर महर्षि को देखने का प्रयास किया। जैसे ही पर्दा हटाया गया, शिष्यों ने उन्हें सर्पाकार दिव्य स्वरूप में देखा और उसी क्षण महर्षि पतंजलि अदृश्य हो गए। लोकमान्यता है कि इसके बाद वह कोंड़र झील, पार्वती अरगा होते हुए वाराणसी के नागकोप क्षेत्र में प्रकट हुए। नागपंचमी के अवसर पर वहां आज भी विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। सनातन धर्म परिषद के अध्यक्ष डॉ. स्वामी भगवदाचार्य के अनुसार महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली गोंडा के वजीरगंज क्षेत्र स्थित कोंड़र में है। लगभग नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली विशाल कोंड़र झील के निकट उनका आश्रम स्थित था, जहां वह साधना और ज्ञानोपदेश करते थे। आश्रम परिसर में रामजानकी मंदिर, शिव मंदिर, देवी स्थान सहित कई प्राचीन पूजास्थल मौजूद हैं। श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए यहां राजस्थान से मंगवाई गई करीब साढ़े पांच फीट ऊंची महर्षि पतंजलि की प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जिसका अनावरण होना अभी शेष है। प्रधान श्रीमती गीता सिंह के बेटे विपिन सिंह ने बताया कि योग दिवस के अवसर पर कोंड़र आश्रम में विशेष कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। स्थानीय संत, विद्वान और सामाजिक संगठन इस स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि योग के जनक महर्षि पतंजलि से जुड़े इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल को योग तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे देश-विदेश के योग साधक, शोधकर्ता और श्रद्धालु यहां आ सकें। इसी दिशा में पर्यटन विभाग ने भी कदम बढ़ाए हैं। कोंड़र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 1 करोड़ 38 लाख रुपये की योजना से काम कराए गए। इसके तहत मल्टीपरपज हॉल, पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था, बैठने के लिए बेंच तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कराया गया है। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी का मानना है कि यदि कोंड़र को योग और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह न केवल गोंडा बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय होगा। आस्था, इतिहास और योग परंपरा का अद्भुत संगम समेटे कोंड़र आज भी महर्षि पतंजलि की स्मृतियों को संजोए हुए हैं।