डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी के गेट पर न तो ड्यूटी कर्मी मिलते और न ही स्ट्रेचर। ऐसे में तीमारदार मरीजों को गोद में इमरजेंसी लाने और ले जाने को मजबूर हो रहे हैं। इस ओर किसी भी जिम्मेदार की नजर नहीं जाती। वहीं, मोर्चरी के सामने कई स्ट्रेचर बेतरतीब पड़े रहते हैं। लोहिया अस्पताल में सीएमएस ने इमरजेंसी गेट पर आकस्मिक मरीजों के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था करने और उन्हें अंदर तक लाने के लिए कर्मचारी को तैनात किया है, मगर यह कर्मचारी कहां रहता है, इसका पता नहीं चलता। मरीजों को लेकर आने वाले तीमारदारों को स्ट्रेचर तक नहीं मिलते। लिहाजा वह गोद में उठाकर मरीजों को इमरजेंसी तक लाने और ले जाने को मजबूर हो रहे हैं। रविवार सुबह 11.54 बजे एक तीमारदार वृद्धा को लेकर आए। उन्हें न तो पोर्टिको में स्ट्रेचर मिला और न ही इमरजेंसी पर्चा काउंटर के पास। लिहाजा एक वृद्धा को लेकर आए तीमारदारों ने गोद में उठा लिया और इमरजेंसी में भर्ती कराया। इसी तरह सोमवार दोपहर 12.12 बजे एक ग्रामीण को इमरजेंसी में भर्ती मां को बाहर लाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। लिहाजा वह वृद्धा को गोद में ही उठाकर बाहर तक लाने को मजबूर हो गए। उधर, हर रोज मोर्चरी में रखे गए शव निकलने के बाद स्ट्रेचरों को वहां से उठाया नहीं जाता। कई-कई दिनों तक तीन-तीन स्ट्रेचर पड़े रहते हैं। इसका खामियाजा तीमारदार और मरीज भुगत रहे हैं। सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि इमरजेंसी गेट पर हर वक्त कर्मचारी तैनात रहता है। वह गायब हो जाता, इसकी जानकारी नहीं है। अब गंभीरता से जांच करवाकर दोषी पर कार्रवाई करेंगे।