टांडाकला में गंगा घाट पर रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे एक दिव्यांग नाविक की नाव को नदी से बाहर निकालने का कार्य हाल ही में पूरा हुआ। दो माह पूर्व तेज आंधी और बाढ़ के कारण यह बड़ी नाव गंगा नदी में डूब गई थी, जिससे नाविक को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। नाविक अरुण निषाद, जो वाराणसी से यह बड़ी नाव खरीदकर लाए थे, ने बताया कि अचानक आई तेज आंधी और बरसात के चलते उनकी नाव गंगा की लहरों में समा गई थी। बाढ़ का पानी घटने के बाद नाव पूरी तरह से मिट्टी और बालू से भर गई थी और गहरे कीचड़ में धंस चुकी थी। स्थानीय मजदूरों को लगाकर पहले नाव के भीतर जमी मिट्टी और बालू को बाहर निकलवाया। इसके बाद, नाव को पानी से बाहर खींचने के लिए विशेष प्रयास किए गए।नाविक को वाराणसी से दो विशाल हाइड्रा क्रेन बुलवानी पड़ी। इन हाइड्रा गाड़ियों की मदद से, बालू और कीचड़ में धँसी नाव को घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया और सुरक्षित रूप से गंगा घाट के किनारे मरम्मत के लिए रखवाया गया। अरुण निषाद के लिए यह नाव उनके और उनके परिवार के लिए रोजगार का एकमात्र साधन थी। नाव के डूबने से उन्हें आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा था, लेकिन अब नाव को बाहर निकालने के बाद उन्होंने जल्द ही इसकी मरम्मत कराकर पुनः संचालन शुरू करने की उम्मीद जताई।