चहनियां क्षेत्र में बृहस्पतिवार को त्रिशक्ति सेवा फाउंडेशन के सदस्यों ने भगवा झंडों का वितरण कर लोगों से चैत शुक्ल प्रतिपदा पर मनाए जाने वाले हिन्दू नववर्ष को व्यापक और भव्य तरीके से मनाने की अपील की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं केवल आस्था पर ही नहीं, बल्कि गहन वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर भी आधारित हैं। हिन्दू नववर्ष, जिसे देश के विभिन्न प्रांतों में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा और उगादी के रूप में मनाया जाता है, प्रकृति और वैज्ञानिक संतुलन का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि हिन्दू पंचांग चंद्र-सौर गणना पर आधारित है और चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष की शुरुआत होती है। इस समय सूर्य उत्तरायण में गतिशील होकर ऊर्जा का संतुलन स्थापित करता है, जबकि अमावस्या के बाद चंद्रमा का शुक्ल पक्ष आरंभ होता है, जो वृद्धि और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों की गति का सूक्ष्म अध्ययन कर जो कालगणना प्रणाली विकसित की, वह आज भी वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित मानी जाती है। इसी कारण नववर्ष की शुरुआत नवरात्रि के उपवास और साधना से होती है। भारतीय परंपरा के अनुसार इसी दिन सृष्टि की शुरुआत मानी जाती है, जो नवसंस्कार, नवसंकल्प और नई चेतना का प्रतीक है। इस अवसर पर अंबरिश सिंह भोला, राहुल अग्रहरी, विनय कुमार, सुभाष सिंह, हरिकेश, योगेन्द्र मिश्रा, त्रिपुरारी, हरिश्चन्द्र, शैलेष, अशोक, जयदीप वर्मा और रामदयाल सहित त्रिशक्ति सेवा फाउंडेशन के सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे।