बेसिक शिक्षा विभाग की पेयरिंग नीति के तहत 50 से कम छात्रों वाले विद्यालयों के बच्चों को नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर शिक्षक और स्थानीय संगठनों ने विरोध जताया है। विद्यालयों को बचाने और छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने गांव गांव जाकर अभियान छेड़ दिया है। प्रथम चरण में बाराबंकी के 100 विद्यालयों को दूसरे स्थान में शिफ्ट किया जा रहा है। दरियाबाद के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मियागंज में तैनात राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक आशुतोष आनंद अवस्थी ने तो अनोखी पहल करते हुए सीधे गाँव के भीतर पहुँचकर छप्पर के नीचे ही कक्षा लगा दी। वे बच्चों को समझा रहे हैं कि पढ़ाई क्यों ज़रूरी है, स्कूल आने से क्या लाभ हैं और सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा कैसे मिलेगा। विशेष रूप से वे उन बच्चों तक पहुँच रहे हैं जो इस समय धान की रोपाई में लगे हुए हैं और स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। उधर, फतेहपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत शाहपुर में तैनात शिक्षक कमलेश कुमार भी मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने माँ शारदा गांव के भीतर जाकर ग्रामीणों और बच्चों को इकट्ठा किया, उन्हें विस्तार से समझाया कि अगर गाँव का अपना स्कूल संचालित रखना है, तो बच्चों की संख्या बढ़ानी होगी। कमलेश कुमार ने अभिभावकों को शपथ भी दिलाई कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजेंगे। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय शाहपुर की ओर से स्कूल चलो अभियान के तहत गाँव में रैली भी निकाली गई, जिससे शिक्षा का संदेश हर घर तक पहुंचे। शिक्षकों की इस मेहनत का उद्देश्य सिर्फ पेयरिंग को रोकना नहीं, बल्कि बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और गाँव में शिक्षा का माहौल सशक्त बनाना भी है।