भूतभावन भोलेनाथ की नगरी महादेवा में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर प्रस्तावित महादेवा कॉरिडोर का निर्माण कार्य अब गति पकड़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के मुख्य द्वार को भव्यता प्रदान करने के लिए राजस्थान से नक्काशीदार पत्थरों की पहली खेप श्री लोधेश्वर महादेवा मंदिर परिसर पहुंच चुकी है। इन पत्थरों का उपयोग कॉरिडोर के भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण में किया जाएगा, जिससे यह श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। परियोजना का विवरण और प्रगति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल 15 हेक्टेयर में विस्तृत महादेवा कॉरिडोर के निर्माण के लिए 159 भवनों का अधिग्रहण किया जा चुका है। इस परियोजना के लिए शासन की ओर से 200 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। अधिग्रहण की प्रक्रिया, जिसमें मकानों की रजिस्ट्री प्रक्रिया भी शामिल है, अंतिम चरण में है। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की देरी से बचने के उद्देश्य से, मुख्य द्वार का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। नक्काशीदार पत्थरों का महत्व राजस्थान से लाए गए ये नक्काशीदार पत्थर आधुनिक डिजाइन से निर्मित हैं और इन्हें मुख्य द्वार के स्तंभों पर लगाया जा रहा है। कॉरिडोर का निर्माण कार्य करा रही लखनऊ मार्बल इंडस्ट्रीज के जूनियर इंजीनियर आयुष विश्वकर्मा ने बताया कि पिलर बनने के बाद इन नक्काशीदार पत्थरों को स्थापित करने का कार्य शुरू हो गया है। इन पत्थरों की कलात्मकता और सुंदरता श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करेगी और कॉरिडोर के अनुभव को और अधिक समृद्ध बनाएगी। भविष्य की योजनाएं महादेवा कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी, बल्कि श्रद्धालुओं को एक बेहतर और सुगम अनुभव प्रदान करेगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सफलता से प्रेरित यह परियोजना, महादेवा को एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।