सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता थोपे जाने के आदेश ने शिक्षकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। इसी का विरोध करते हुए बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षिकाएं बीएसए कार्यालय पहुंचीं और जमकर नारेबाजी की। शिक्षिकाओं ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद ही टीईटी पास अभ्यर्थियों की नियुक्तियां शुरू हुईं, लेकिन 2011 से पहले तैनात हुए शिक्षकों पर अचानक यह बाध्यता थोपना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक है। लंबे समय से सेवा कर रहे शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा भी यह नहीं कहती कि किसी शिक्षक की क्षमता पर संदेह किया जाए। शिक्षिकाओं ने मांग की कि सरकार आदेश को तत्काल वापस ले और पुराने शिक्षकों को इस बाध्यता से मुक्त किया जाए।