बाराबंकी जिला अस्पताल का ट्रामा सेंटर बृहस्पति की रात स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का आईना बन गया। आधी रात करीब 12 बजे हालत यह थी कि बुखार से तपते मरीजों को एक अदद बेड तक नसीब नहीं हो रहा था। वार्ड में कहीं एक-एक बेड पर तीन-तीन लोग लेटे थे, तो कहीं दो-दो मरीजों को ठूंस दिया गया था। इब्राहिमाबाद गांव निवासी शिवम को दोपहर में तेज बुखार की हालत में परिजन लेकर पहुंचे, मगर बेड न मिलने पर उसे बेंच पर ही भर्ती कर लिया गया। इसी तरह एक महिला अपने तीन साल के बच्चे को लेकर पहुंची, तो उसे भी बेंच पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया गया। इमरजेंसी वार्ड में ही एक ही बेड पर दो घायल और बीच में एक तीमारदार को लिटा दिया गया था। यानी एक बेड पर तीन-तीन लोग। मरीजों की जांच और दवा वितरण में भी भारी लापरवाही दिखी। इमरजेंसी में केवल एक डॉक्टर मौजूद थे, जबकि इंजेक्शन लगाने और दवा देने का काम मेडिकल कॉलेज के छात्र करते नजर आए। वहीं फर्श पर फैला कचरा और गंदगी यह साफ जाहिर कर रही थी कि हाल ही में सीएमएस बदले जाने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया है। बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच तक समय पर नहीं हो पा रही थी। कोई दोपहर से भर्ती होकर इंतज़ार कर रहा था तो कोई शाम से। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बुखार का प्रकोप चरम पर है, तब भी ओपीडी में जांच की सुविधा सिर्फ सुबह 11 बजे तक ही क्यों सीमित हैं।