सुविधाओं से भरी आधुनिक जिंदगी के साथ खतरों का दायरा भी बढ़ गया है। इंटरनेट हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन यह जानकर हैरानी होती है कि डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े अधिकारी तक साइबर ठगी के शिकार हो जाते हैं। जबकि, जो लोग इंटरनेट और मोबाइल से दूर हैं, वे अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि शिक्षित लोग भी आसानी से साइबर अपराधियों के झांसे में आ जाते हैं। यह बातें बाराबंकी में पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने शनिवार को अमर उजाला द्वारा शहर के लखनऊ-अयोध्या मार्ग स्थित राजकीय पुस्तकालय में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में कहीं। इस मौके पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी त्रिपाठी ने की, जबकि संयोजन जिला पुस्तकालय की अधीक्षिका डॉ. पूनम सिंह ने किया। एसपी विजयवर्गीय ने कहा कि लालच और डर दो ऐसे हथियार हैं जिनसे अपराधी फायदा उठाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कैरियर संबंधी सुझाव भी दिए। स्वयं इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से होने के कारण उन्होंने बच्चों को सिविल सेवा के साथ-साथ इंजीनियरिंग के गुर भी सिखाए। इस दौरान एसपी ने विद्यार्थियों को खुलकर सवाल पूछने के लिए आमंत्रित किया। छात्र-छात्राओं ने भी बड़ी उत्सुकता से सवाल किए। एक छात्रा ने पूछा कि अक्सर महिला कांस्टेबल रास्ते में नाम-पता पूछकर रजिस्टर में दर्ज करती हैं, क्या इससे घबराना चाहिए? इस पर एसपी ने कहा कि यह सर्वे का हिस्सा होता है। एक जिम्मेदार नागरिक की तरह पुलिस को जानकारी देना अच्छी बात है, साथ ही अपनी परेशानी भी उनसे साझा की जा सकती है। यातायात प्रभारी आलोक पाठक ने विद्यार्थियों से कहा कि सड़क पर हमेशा हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ निकलें और यातायात नियमों का पालन करें। वहीं महिला थाना प्रभारी मुन्नी सिंह ने छात्राओं को विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। यातायात प्रभारी रामजतन यादव ने यातायात संबंधी आवश्यक जानकारी साझा की।