बाराबंकी के रामनगर स्थित श्री लोधेश्वर महादेवा के फाल्गुनी मेले में डमरू और ढोलक की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी। इन दिनों हुनरमंद कारीगर ढोलक और डमरू तैयार करने में जुटे हैं। कोई रंगाई कर रहा है, तो कोई लकड़ी सेट कर रहा है। प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले शिवभक्त यहां से डमरू और ढोलक खरीदकर ले जाते हैं। हालांकि अभी मेले की रौनक पूरी तरह नहीं जमी है, लेकिन दुकानें सजने लगी हैं। यह मेला ढोलक और डमरू के कारोबार के लिए खासा मशहूर है। इस बार जैदपुर से 30 से अधिक व्यापारी यहां दुकानें लगा चुके हैं। ढोलक व्यापारी फरीदुद्दीन ने बताया कि यह कारोबार उन्हें विरासत में मिला है और वह पिछले 25 वर्षों से यहां दुकान लगा रहे हैं। उनके पास 500 सौ रूपये से लेकर,5 हजार तक की ढोलक उपलब्ध है। व्यापारी बताते हैं कि कटहल की लकड़ी से बनी ढोलक की थाप सबसे बेहतरीन होती है।